Sunday, 22 March 2015

चलो परम के देश


भजन .

चलो परम के देश, जहाँ पर प्यार बरसता है ।

मृत्यु स्वयं मर गई ,यहाँ आनंद उमड़ता है ।।

यहाँ न कोई ऊँच -नीच, सब जन भाई -भाई।

यहाँ ना कोई जात -पात की रेखा खिंच पाई ।।

परम प्रभु का प्यार यहाँ कण -कण में हँसता है ।

यहाँ घृणा का नाग किसी को कभी न डंसता है ।।

परमपुरी का धाम बना सब धामों में नयारा ।

लगा -लगाकर जोर अंत में कलयुग भी हारा ।।

शिव की काशी यहीं ,कैलाश हमारा है।

मथुरा -पुरी -अयोध्या सबका यहीं नजारा है।।

शिव का यह दरबार यहाँ सबका होता स्वागत ।

शोषित -पतित -दलित बनते हैं इसके अभ्यागत ।।

परम दृष्टि पड़ते ही सबका होता रूपांतर ।

विमल ज्योति से जगमग-जगमग हो उठता अंतर ।।

प्रेमवारि का यह प्रवाह कलकल बहता जाता ।

इसे पानकर विशम्भर से जुड़ जाता नाता ।।

चलो परम के देश, परम प्रभु कब से बुला रहे ।

प्रेम -वारि में उनके जग का सब दुख -दर्द बहे ।।

---------------------------------डा 0सुरेश प्रसाद रॉय

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